29 दिसंबर 2020 - 11:59
कर्नाटक की भाजपा सरकार ने गोहत्‍या रोधी अध्‍यादेश को मंज़ूरी दी, राज्य में किसी भी तरह का पशुवध नहीं होगा, मिलेगी सख़्त सज़ाएं ...

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने सोमवार को गोहत्या पर रोक लगाने से संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इस अध्यादेश पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कर्नाटक में गोहत्या दंडनीय अपराध बन जाएगा।

कर्नाटक विधानसभा में इससे संबंधित विधेयक को 9 दिसम्बर को पारित किया गया था, लेकिन वह विधान परिषद में लंबित है, इसलिए देर न करते हुए राज्य सरकार ने अध्यादेश के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है।

राज्य के पशुपालन मंत्री प्रभु चव्हाण ने कहा कि कुछ दिनों में एक क़ानून होगा, राज्य में पशुवध नहीं होगा, भाजपा गायों की रक्षा को लेकर दृढ़ है, इसलिए बिल को अध्यादेश द्वारा लागू किया जा रहा है।

इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक की भाजपा सरकार ने विधानसभा में कर्नाटक प्रिवेंशन ऑफ़ स्लॉटर एंड प्रिज़रवेशन ऑफ़ कैटल बिल 2020 को मंजूरी दी थी, लेकिन यह विधान परिषद में पारित नहीं हुआ।

इस बिल के तहत राज्य में गाय, बछड़े, बैल और भैंस के वध पर रोक है। इस बिल के पूर्ण क्रियान्वयन पर कर्नाटक में बीफ़ पर पूर्ण प्रतिबंध हो जाएगा।

नए क़ानून के तहत उल्लंघनकर्ताओं पर सात साल की अधिकतम सज़ा और पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

इससे राज्य में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और पशुओं की तस्करी, अवैध परिवहन, गायों पर अत्याचार और पशुवध करने वालों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

ज्ञात रहे कि 2020 का यह बिल 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सरकार द्वारा पारित कराए गए क़ानून से अधिक सख़्त है।

2010 के कानून को राज्यपाल से मंजूरी न मिलने के कारण 2013 में कांग्रेस सरकार द्वारा ख़त्म कर दिया गया था। इसके बाद कांग्रेस सरकार कम कड़ा क़ानून गोहत्या और पशु संरक्षण अधिनियम 1964 पर वापस चली गई, जो कुछ प्रतिबंधों के साथ गोहत्या की अनुमति देता है।